(डॉ. लोकनाथ पांडेय)
काशी संदेश , वाराणसी। उत्तर प्रदेश में आगामी वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी चौसर पर नए-नए मोहरे बिछने शुरू हो गए हैं। आगामी 8 जून को दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बड़ी बैठक होने जा रही है। इस बैठक में कांग्रेस की सोनिया गाँधी, सपा के अखिलेश यादव, टीएमसी, कम्युनिस्ट समेत सभी दलों के शीर्ष नेता जुटने जा रहे हैं। बैठक में इंडिया गठबंधन के नेता आगामी यूपी विधानसभा के अलावा अगले वर्ष होने वाले अन्य प्रदेश के चुनाव को लेकर भी गहन मंथन करेंगे।
बताते चलें कि पिछली बार इस बैठक से दूर रहीं बंगाल की पूर्व मुख्य मंत्री ममता बनर्जी बंगाल में मात खाने के बाद अब बैठक में शामिल होने की घोषणा कर चुकी हैं। इधर भाजपा ने भी अपने नेताओं के पेंच कसने शुरू कर दिए हैं। जिलों में कमेटी गठन के साथ ही अब क्षेत्रीय अध्यक्षों की सूची भी एक-दो दिन में जारी हो सकती है।
ताजा जानकारी के अनुसार चुनाव की तैयारी में जुटी योगी सरकार ने कई मंत्रियों के जिलों का प्रभार भी बदल दिया है। कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को वाराणसी और लखनऊ का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। नंद गोपाल गुप्ता (नंदी) को मिर्जापुर और चित्रकूट का प्रभार दिया गया। अनिल राजभर को आजमगढ़ और सिद्धार्थनगर का प्रभार जबकि अरविंद कुमार शर्मा को जौनपुर और भदोही का प्रभार सौंपा गया है। इसी तरह राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल को गाजीपुर दयाशंकर सिंह को देवरिया और मऊ तथा डॉ. दयाशंकर मिश्र( दयालु )को बलिया और महाराजगंज का प्रभार दिया गया है। राज्य मंत्री संजीव गोंड को चंदौली जबकि हंसराज विश्वकर्मा को सोनभद्र का प्रभार सौंपा गया है।
इसी तरह भुपेंद्र सिंह चौधरी को आगरा, कासगंज की जिम्मेदारी सौंपी गई। मनोज पांडेय को सीतापुर की कमान मिली।
बेबी रानी मौर्य को झांसी से हटाकर इटावा, हाथरस दिया गया। जयवीर सिंह को आगरा से हटाकर झांसी दे दिया गया, फर्रुखाबाद भी उनके पास पहले से जो बना रहेगा।
स्वतंत्र देव सिंह को प्रयागराज और गोरखपुर, सूर्य प्रताप शाही को अयोध्या और बस्ती तथा धर्मपाल सिंह को गाजियाबाद और रामपुर का प्रभाव दिया गया है।
योगी सरकार ने क्षेत्रीय सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए यह नई जिम्मेदारी मंत्रियों को दी है। इसी बहाने सरकार ने संगठन और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बनाने का संदेश देने और चुनावी रणनीति को नई धार देने की कोशिश भी की है। एक साथ लगा दो।