पूर्व मंत्री के पुत्र ने 1966 में शुरू किया उद्यम, धनंजय, शबलू दे रहे गांव में ही बेरोजगारों को काम
( डॉ. लोकनाथ पांडेय )
काशी संदेश, वाराणसी। बनारस कैंट से मात्र 9 किलोमीटर दूर विश्व प्रसिद्ध चिरईगांव का अचार मुरब्बा आज भी लोगों को खूब लुभा रहा है। यहां गजब की सोंधी मिट्टी में उपजे फलों से निर्मित मुरब्बा ,अचार के स्वाद हेतु लोग दूर से ही खींचे चले जाते हैं। काशी संदेश के प्रधान संपादक डॉ. लोकनाथ पांडेय और उनकी टीम ने यहां का दौरा कर उद्यमियों और गांव के लोगों से बातचीत किया। यहां पूर्व परिवहन मंत्री के बेटे अजय कुमार मौर्य गांव के प्रधान और उद्यमी धनंजय मौर्य समेत अनेक लोगों ने गांव की जो तस्वीर बयां की वह यहां की समृद्ध विरासत और विकसित भारत के सपने को पूर्ण करती दिख रही है। चिरईगांव निवासी पूर्व परिवहन मंत्री उदयनाथ मौर्य के सुपुत्र 85 वर्षीय अजय मौर्या की बेटी अमेरिका में रहती है। अजय मौर्य ने उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद सरकारी नौकरी कर रहे थे। इसी बीच कुछ दिन बाद उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ कर सन 1966 में चिरईगांव में ही आचार मुरब्बे का काम शुरू कर दिया। बताते चलें कि इस परिवार से जुड़े चेचेरे भाई आनंद रत्न मौर्य चंदौली लोकसभा से भाजपा के तीन बार सांसद चुने गए,लेकिन अजय मौर्य ने कभी राजनीति में कदम ही नहीं रखा।
बेहद मृदुभाषी और कुलीन परिवार के अजय मौर्य ने उम्र के चौथे पायदान पर अब यह काम ग्राम प्रधान धनंजय मौर्य और पड़ोसी शबलू को सौंप दिया है । फिलहाल वे नई शोध करते खुद फैक्ट्री की देखरेख भी करते रहते हैं। ग्राम प्रधान धनंजय ने बताया कि उनकी फैक्ट्री में अब दर्जनों लोग काम करते हैं और गांव में ही युवाओं को स्वरोजगार मिल रहा। इसी फैक्ट्री से सीखकर निकले दर्जनों लोग भी छोटे ,छोटे फैक्ट्री डाल कर चिरईगांव में अपना प्रोडक्ट बना रहे हैं। इससे इस इलाके का नाम रोशन हो रहा। इस विधा से तमाम लोगों को गांव में ही रोजगार भी उपलब्ध हो रहा हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि यहां का पपीता ,अमरूद, शरीफा, शहतूत, बेल, आंवला, करौंदा समेत अनगिनत फल अन्य स्थानों से काफी स्वादिष्ट और लजीज होते हैं। इन्हीं फलों से बने मुरब्बा, अचार और अन्य सामग्री में जो असली स्वाद है वह अन्य जगह नहीं मिलता। कुछ जगह लोग सिंथेटिक रंग आदि वाले प्रोडक्ट बनाकर बेचते हैं जबकि चिरईगांव में केमिकल विहीन असली प्रोडक्ट पर ही पूरा फोकस रहता है जिसके कारण यहां माल बनते हैं बिक भी जाता है।